शास्त्रों में लिखा है, रात को सोते समय ना करें ये गलतियां

अच्छी दिनचर्या के लिए सोना बेहद जरुरी है लेकिन शास्त्रों में बताया गया है की सोने का सही तरीका क्या है और कुछ निर्देश भी दिए है –  सोते समय साउथ यानी दक्षिण दिशा की और सिर रखकर ही सोना चाहिए, ऐसा शास्त्रों के साथ साथ विज्ञान में भी लिखा है यह मान्यता शास्त्रों की प्रचिलित मान्यताओं के साथ साथ वैज्ञानिक तथ्यों पर भी आधारित है। आपका सिर दक्षिणी और पैर उत्तर दिशा की और हो प्रचिलित मान्यताओं में  सोने के ऐसे ही निर्देश है।

क्यों करें ऐसा ?

वैज्ञानिक तथ्य की माने तो धरती  में जो चुम्बकीय पावर है वो दक्षिण से उत्तर की और चलती है ऐसे में साउथ की ओर सिर करने वालों के एनर्जी सिर से प्रवेश कर पाँव से निकल जाती है इसीलिए आप सुबह एकदम पॉजिटिव और तरोताज़ा उठते है।
उत्तर दिशा में सिर कर सोने से सुबह बेवजह की थकान हो सकती है और सुबह पर बेवजह की उदासी हावी हो सकती है।
सनातन धर्म में सूर्य को भगवान माना जाता है और सुबह सुबह सूर्य पूर्व दिशा में उगता है ऐसे में जब वे प्रकट होते है तो  उनकी और पाँव करना अच्छा नहीं माना जाता इसीलिए दक्षिण न हो  पाये तो पूर्व दिशा की और सिर कर भी सोया जा सकता है किन्तु पश्चिम दिशा में सिर कर न सोये।

कुछ महत्वपूर्ण निर्देश :-
शाम के वक्त जब देवी देवताओं के भ्रमण का या पुजन का वक्त होता है तब सोना नहीं चाहिए , शास्त्रों में वर्जित है।
सोने से एकदम पहले भोजन नहीं करना चाहिए ये अंतराल कम से कम २ घंटे हो।
सदैव मन शांत कर कर ही सोवें किसी प्रकार का गुस्सा, चिंता लेकर कभी बिस्तर पर न जाये
सोने से पहले भगवान को याद कर सोना चाहिए।

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