नवरात्र में ये काम करने से बचे, शरीर की सात्विक शक्ति का नाश होता है

नवरात्र में या पूजा के समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए ? जिससे आपको पूजा का पूरा पुण्य मिले, और सौभाग्य का नाश ना हो, जानिए-

शास्त्रों में ऐसे कई कामों का उल्लेख है जिन्हें नवरात्र, व्रत- उपवास पर करने से पूजा का पूरा पुण्य मिलता है, वहीँ ऐसे कामों का भी वर्णन है जिन्हें करने पुण्य नष्ट हो जाता है, और आपके द्वारा किये गए व्रत, तीर्थ और पूजा का कोई फल आपको नहीं मिलता है और देवी रूठ जाती है।  ऐसे में नवरात्र में सिर्फ वे ही कार्य करने चाहिए जिससे माँ जगदम्बा प्रसन्न हो।

नवरात्रों में पूजन के दौरान देवी के दिव्य मन्त्रों का जाप करना उचित रहता है इससे माँ प्रसन्न होती है वहीँ इस दौरान व्यक्ति किसी की निंदा, चुगली करता है, या भला बुरा कहता है, अपने मुख से अपशब्द कहता है तो उसके पुण्य का नाश होता है, ऐसा करने से उसके शरीर की सात्विक शक्ति का नाश होता है।

कहा जाता है जी जिव्हा यानि जीभ पर माँ सरस्वती का वास होता है ऐसे में यह ध्यान रखा जाना जरूरी है की ख़ास तौर पर नवरात्र में जिव्हा का प्रयोग अच्छा बोलनें, मंत्र का जप करने जैसे कार्यों में ही हो। जो लोग बात बात पर अपशब्द या गाली बोलते है उन्हें यह ध्यान रखना चहिये की ऐसा करके वे अपने सौभाग्य को ही नष्ट कर रहे होते है, इसलिए इस बात का सदा ध्यान रखना चाहिए।

इसके अलावा नवरात्र संयम का भी पर्व है, इस दौरान ये भी ध्यान रखना चाहिए की स्वाद par संयम रखा जाये, नवरात्र के दौरान प्याज, लहसुन का पूरी तरह त्याग कर देना चाहिए, लहसुन मन की एकाग्रता को भंग करता है।  साथ ही मांसाहार से दूरी बना लेनी चाहिए, और मदिरा के सेवन से बचना चाहिए। ये सब भी पुण्य का नाश करने वाले होते है।

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