गन्दी फिल्में भी क्यों पास कर देता है सेंसर बोर्ड, जानिए पीछे का सच

फिल्में बनाने के बाद प्रोडूसर को सेंसर बोर्ड से पास कराना होता है सेंसर पूरी फिल्म देखता है और समाज के लिहाज से सही लगने पर उसे प्रमाण पत्र दे कर पास कर देता है तभी फिल्म थिएटर में दिखाई जाती है, बगैर सेंसर के पास किये फिल्म रिलीज़ नही हो सकती है।

पर इतना बड़ा बोर्ड होने के बावजूद ऐसे फिल्में भी रिलीज़ हो रही है जिनका समाज पर बुरा असर पर रहा है जिनमें अश्लीलता के साथ साथ गंदे और अभद्र भाषा वाले शब्द और गाली गलौच का भरपूर इस्तेमाल हुआ है।  ऐसे में सेंसर पर सवालिया निशान उठने लगे है।

पर सेंसर यूँ ही फिल्में पास नही कर देता इसके पीछे है एक चौका देने वाला खुलासा जो खुद सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष ने किया है।
सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष निहलानी ने हाल ही में फिल्मों में बैन शब्दों की लिस्ट जारी की है इनमें ऐसे शब्द शामिल है इन्हे आप फिल्मों में शामिल नही कर सकते।  इन नए रूल्स के बाद वे कंट्रोवर्सीज में फंस गए है तब उन्होंने एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में किया खुलासा –

सेंसर बोर्ड के नए चेयरपर्सन पहलाज निहलानी ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में बताया की ये नए नियम उनके बनाये हुए नही है बल्कि ये तो पहले के ही सेंसर के रूल्स है पर उन्हें फॉलो नही किया जा रहा था उन्होंने बस इन्हे वापिस ऊपर उठाया है।
2006 में आई फिल्म ओमकारा ने नियमों को तोडना शुरू किया उस फिल्म में जमकर अभद्र भाषा और गालिओं का इस्तेमाल हुआ उसके बाद से ही ऐसी फिल्मों को पास करवाने के लिए शुरू हुआ करप्शन।

गलत फिल्म को पास करवाने के लिए सेंसर में भारी रकम दी जाती है।
अध्यक्ष ने एक बात और बताई की आजकल फिल्ममेकर्स धोखाधड़ी भी करते है वे सेंसर को डुप्लीकेट कॉपी दिखाते है जो एकदम साफ़ सुथरी और एडिटेड होती है और सर्टिफिकेट मिलने के बाद कुछ अलग ही फिल्म दर्शकों को थिएटर में दिखाई जाती है।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.