आज रात से ही बाएं करवट सोने की आदत डाल लें, जानिए वजह

अच्छी  सेहत के लिए 8 घंटे की पर्याप्त नींद बेहद जरूरी होती है।  लेकिन कुछ लोग सोते समय ठीक से नींद नहीं ले पाते, पर्याप्त नींद ना लेने के कारण  बाएं और स्किन के अलावा और भी कई समस्याओं को हमे झेलना पड़ता है।  अच्छी  नींद का सम्बन्ध आपके सोने के तरीके से भी होता है। कुछ लोग रात को सोते समय पेट या पीठ के बल सोते है।  लेकिन अच्छी  सेहत के लिए बांयी और करवट करकर सोना बेहतर होता है।  जानिए बायें करवट सोने के फायदे- 

सोने का सही तरीका

हमारे पेट में मौजूद एसिड भोजन को पचाने में मददगार होता है। रात को लेफ्ट की तरह करवट करके सोने से पेट में मौजूद एसिड भोजन नली में जाने की बजाय पेट की थैली में चला जाता है जिससे खाना आसानी से पच जाता है और गैस या एसिडिटी की प्रॉब्लम नहीं रहती है।

जब आप रात को बाईं करवट सो रहे होते है तो पेट में मौजूद मल और वेस्टेज छोटी आंत से बड़ी आंत में आसानी से शिफ्ट हो जाता है जिससे आँतों को एक्स्ट्रा काम नहीं करना पड़ता और आपका पाचन सिस्टम एकदम बेहतर रहता है। इसलिए रात को सोते समय बाईं करवट सोने की आदत डाल लें।

बाएं करवट सोने से हमारे शरीर को ख़राब टोक्सिन, वेस्टेज और लिम्फ फ्लूइड को फ़िल्टर करने के लिए पर्याप्त टाइम मिल जाता है। क्योंकि लेफ्ट लिम्फैटिक साइड (lymphatic side) ज्यादा प्रभावी होती है जिससे वो वेस्टेज को बायीं ओर स्थित थोरासिक डक्ट (thoracic duct) में आसानी से ट्रांसफर कर देती है।

कुछ लोग रात को पीठ के बल सोते है, पीठ के बल बल सोने की वजह से उनके गले और जीभ की मसल्स पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ता है जिससे सांस लेने में शरीर को थोड़ी कठिनाई होती है जिसकी वजह से लोग खर्राटें लेना स्टार्ट कर देते है। ऐसे में बायीं करवट सोने पर ये मांशपेशियां एकदम रिलैक्स होती है जिससे खर्राटें वाले प्रॉब्लम से निजात पाई जा सकती है। बांयी करवट सोने से हमारी  स्पाइन पर भी कम प्रेशर पड़ता है।
साथ ही जो लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से पीड़ित हैं उन्हें भी बाएं करवट सोने की सलाह दी जाती है जिससे उन्हें काफी आराम मिलता है।

प्रेग्नेंट महिलाओं को भी डॉक्टर्स बांये करवट सोने की एडवाइस देते है क्योंकि दांयी करवट या पीठ के बल सोने से खून का प्रवाह उतना ठीक नहीं हो पाता है।  इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बांयी और करवट कर सोना बहुत फायदेमंत है इससे गर्भाशय, दिल और किडनी में पर्याप्त मात्रा में खून का फ्लो बढ़ जाता है।

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