प्रेरणादायक कहानी : अच्छे भविष्य की तैयारी पहले ही कर लें

इस कहानी से आपको शिक्षा मिलेगी की अपने भविष्य पर समय रहते ही ध्यान लगाए और उसे सुधार लें, वर्ना आज के सुख के लिए भविष्य में दुःख पा सकते है।
जैसे आज के दौर में सरकारें चलती है हर पांच साल बाद सरकार बदल दी जाती है वैसे ही किसी राज्य में राज करने वाला शासक यानि राजा हर साल बदल दिया जाता था। हर साल प्रजा को चलाने एक नया राजा नियुक्त होता था और साल पूरा होने पर उसके सारे कपडे उतार लिए जाते थे और सिर्फ लंगोट में एक चादर ओढाकर उसे नदी किनारे नाव में बिठा दिया जाता था और नदी के उस पर भेज दिया जाता था। नदी के उस पर घना जंगल था और कोई आबादी नही थी, वहां खाने पीने की कोई व्यवस्था नही होती थी कोई शख्स नही होता था सिर्फ दूर दूर तक घना जंगल होता था। ऐसे में जो राजा विदा लेकर उस जंगल में जाता था वह पूरी ज़िन्दगी दुःख भोग भोग कर ही मर जाता था।

बहुत समय से यही प्रथा चली आ रही थी की राजा पूरे साल राज्य पर राज करता, सारे ऐश ओ आराम करता और अंत में एक चादर में विदा होकर जंगलों में दुःख भोगता। एक साल पूरा होने के बाद नया राजा उस राज्य में नियुक्त हो गया। राजा को वहां का नियम मालूम ही था फिर भी उसे मंत्रियों द्वारा सारे काम काज के बारे में भी बताया गया और एक साल बाद का नियम भी बताया। राजा ने मंत्रियों से पुछा की उसके पास कितना समय है, मंत्रियों ने कहा – एक साल। राजा ने पुछा – मेरे अधिकार क्या है ? मंत्रियों ने कहा – राजन, आप तो कुछ भी कर सकते है, आपके पास कुछ भी करने का अधिकार है।
थोड़े समय बाद ही राजा को खुश करने के लिए तरह तरह के लोगों ने उन्हें बड़े बड़े भोग में, नाच गानों में आमंत्रित करना शुरू किया। हर तरह के मनोरंजन और मोह माया से उन्हें खुश करने की कोशिश की गयी, ताकि राजा खुश हो और उनके सारे काम आसानी से हो जाये।

राजा समझदार था, एक तरह उसे सारे आराम दिख रहे थे और दूसरी और उसे ये भी पता था की ये सब सिर्फ एक साल के लिए ही है और उसके बाद वही हाल होगा जो दूसरे राजाओं का हुआ है। उसे भी वहीँ जंगलों में जाना होगा और दुःख भोगने होंगे।
उसने बिना समय गंवाएं कुछ निर्णय लिए, उसने इन मदिरा सेवन, नाच गान, मनोरंजन आदि को तुरंत अपने राजमहल में बंद करवा दिया और अपना सारा ध्यान सिर्फ ईमानदारी से काम करने में लगाया। क्योंकि उसकी अपनी प्रजा और राज्य के प्रति कुछ जिम्मेदारियां थी। इसके बाद उसमें मंत्रियों को बुलाया और आदेश दे डाला की नदी के उस पर के सारे जंगल के स्थान पर एक बड़ा नगर स्थापित किया जाये और यहाँ की तरह सारे खान पान, मनोरंजन की चीज़ें, व्यापर, और अन्य सभी चीज़ें और सेवाएं वहां भी स्थापित की जाये। और यह काम आने वाले 10 से 11 महीनों में हो जाना चाहिए। राजा ने कहे अनुसार नदी पर जंगल को एक अच्छे नगर में विकसित कर दिया गया और लोगों का वहां निवास हो गया, और साल के अंत तक वहां एक भरा पूरा नगर बस गया। इस बीच राजा ने अपने राज्य के लिए अच्छे से काम किया।
अब एक साल पूरा हो चुका था और राजा के विदा लेने का समय आया। नियम के अनुसार राजा के सभी कपडे उतार लिए गए और एक चादर ओढाकर उन्हें नाव में बिठा दिया गया। राजा हंस रहे थे। तब मंत्री ने पुछा की राजन, यहाँ से विदा होने वाले सभी राजा विदा होते समय रोते हुए जाते है और आप हंस रहे है ?
राजा ने कहा मैं अपने एक साल के कार्यकाल में नहीं हंसा इसलिए हँसता हुआ जा रहा हूँ, और दूसरे राजा अपने कार्यकाल में खूब हंसे, सारे आराम किये, ज़िन्दगी के हर मजे किये, इसलिए वे यहाँ से रोते हुए गए।

यही बात हमारी ज़िन्दगी में भी लागू होती है दरअसल जब हमारा अच्छा समय चल रहा होता है या जब वक़्त होता है तब हम वर्तमान की अस्थायी खुशियों को हासिल कर ही खुश हो जाते है और भविष्य के बारे में नहीं सोचते है। जबकि वही सही वक़्त होता है जब हम वर्तमान में मौजूद अपने अधिकारों और अपनी ताकत से अपने भविष्य को सुदृढ़ और मजबूत बना लें। वर्ना जब वक़्त बदलेगा तब हमारे पास पछताने के अलावा और कोई चारा नहीं रह जाएगा और दूसरे राजाओं की तरह हमें भी रोते हुए ही विदा होना पड़ेगा।

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