ख़बरदार! कहीं आपके चलने का तरीका गलत तो नहीं ?

अगर आपके चलते वक़्त आपकी कमर मटकती है तो आपको सावधान हो जाने की जरुरत है कहीं ऐसा न हो की आपका कूल्हा जावाब दे जाये।
जेए ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, ग्वालियर के डॉ. समीर गुप्ता के अनुसार 70 फीसद लोगों को चलने का सही तरीका नहीं पता है। क्योंकि बचपन में बच्चो को सही तरीके से चलने के बारें में कोई पेरेंट्स नही सीखते है तो जाहिर सी बात है बच्चे अपने हिसाब से ही चलना शुरू कर देते है।

कुछ तो जाने अनजाने में सही तरीका अपना लेते है लेकिन बहुत से बच्चों के बचपन से गलत तरीके से चलने के कारण उनके कूल्हों पर खराब प्रभाव पढता है।
जोड़ घिसने लग जाते है और बारीक शरण शुरू हो जाते है। धीरे धीरे ये प्रक्रिया तेज होती चली जाती है।
शोध के अनुसार महिलाओं में कूल्हों की बीमारी पुरुषों के बनिस्पत अधिक देखने को मिलती है हर सौ में से पांचवी महिला कूल्हे के दर्द का शिकार है।
आपने कितनी ही न्यूज़ में पढ़ा होगा की कूल्हों का प्रत्यारोपण करना पड़ा है यानि ऑपरेशन कर दूसरा लगा दिया जाता है। ये परेशानिया कहीं न कहीं इसी से जुडी हुई है।

डॉ. समीर गुप्ता बताते है शरीर का पूरा वजन नाभि से कंट्रोल होता है और लगातार और गलत तरीके से चलने से दिमाग में सर्किट बनने स्टार्ट हो जाते है गलत तरीके से चलने से सेंटर ऑफ ग्रेविटी में मिलीमीटर के आकार में बदलाव होता है। जब इसका साइज बड़ा होने लगता है और इसका सबसे अधिक प्रभाव कूल्हों पर ही पड़ने लगता है।
भारत में कई बड़े शहरों में जैसे मुंबई, दिल्ली , बंगलौर में  दर्जनों गेट एनालिसिस सेंटर चल रहे हैं। जहां सीसीटीवी, फ्रेशर पैड सहित अन्य तरीके से मरीजों की चाल पर विशेष ध्यान देते हैं फिर इसी आधार पर उसका इलाज किया जाता है।
दूसरी और कूल्हे में खराबी केल्शियम और विटामिन डी की कमी से भी हो जाती है।
आप हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखा सकते है वह आपकी चाल देख कर ही बीमारी का पता लगा लेगा।
सावधानी से चलिए ज्यादा मटक मटक के चलने से परेशानी में पड़ सकते है। 

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