चाणक्य नीति – ये पांच चीजे आपका जीवन नरक बनाती है !

भारत के महान विद्वान आचार्य चाणक्य ने अपनी चाणक्य नीति में बताया है की हमारे जीवन में वे कौन सी बातें है जो हमारे जीवन को नरक बनाती है. अगर आप चाणक्य नीति की ओर देखे तो आप पाएंगे की चाणक्य की बताई गई अधिकतर बातें आज हमारे जीवन में लागू होती है और इनको फॉलो करने पर आपका जीवन बेहतर बन सकता है.

चाणक्य नीति – पांच चीजे जो आपका जीवन नरक बनाती है ! 

  • अत्यधिक क्रोध करना  –

आचार्य चाणक्य कहते है की जो व्यक्ति अत्यधिक क्रोध करने वाला होता है उसे कभी भी शांति नहीं मिल सकती. वह अपनी लाइफ में हमेशा परेशान ही रहता है. गुस्सा करना कभी भी हमारे लिए बेहतर नहीं होता. इसका अंजाम हमेशा ही बुरा होता है. क्रोध करने से कोई भी बात बनती नहीं है बल्कि बिगड़ जाती है. क्रोध करने वाले व्यक्ति का गुस्सा शांत हो जाता है तो उसे पछताना पड़ता है. जिस व्यक्ति को गुस्सा आता है उसके साथ कोई भी रहना नहीं चाहेगा. हर कोई उससे दूर ही रहता है.

ऐसे लोगो के दोस्त भी बहुत कम होते है, इसलिए गुस्सा करना हमारे लिए बिलकुल भी फायदेमंद नहीं है. यह एक ऐसी गन्दी जड़ है जो कई अच्छे – अच्छे रिश्तो को भी पल भर में तोड़ देती है. सही काम को बिगाड़ देती है. इसलिए मित्रो जब भी आपको गुस्सा आये इसे कण्ट्रोल करे. अगर control नही होगा तो यह आपको बार – बार नरक का अहसास कराएगी.

  • दरिद्रता का होना  –

जिस व्यक्ति के घर में या स्वयं वह व्यक्ति दरिद्र होता है वह कभी भी खुश नहीं रह पाता. हमेशा ही वह परेशान रहता है. दरिद्र आदमी जीता तो है पर वह एक जिंदा लाश की तरह होता है. वह अपनी ज़िन्दगी जीता नहीं बल्कि अपनी ज़िन्दगी काटता है. जो व्यक्ति जन्मजात दरिद्र होते है उनकी लाइफ तो बेकार होती है पर कई ऐसे भी लोग होते है जो अपनी लाइफ को खुद दरिद्र बनाने में लगे रहते है. ऐसे लोग अपनी ज़िन्दगी पर ध्यान नहीं देते. खुद को दरिद्रता की ओर धकेल देते है.

ऐसे लोगो के पास धन – दौलत व इज्जत होती है पर ऐसे लोग अपनी बुरी आदतों और अपने कुकर्मो से खुद अपने ही पैरो पर कुल्हाड़ी मारने का काम करते है. ऐसे लोगो को जब अपने कर्मो का फल मिलता है तो वे खुद को जीते जी नरक में पाते है. इसलिए हमेशा यह कोशिश करो की आपको कभी भी दरिद्र भरा जीवन न जीना पड़े. अगर दरिद्रता आ गयी तो समझ लो नरक में जीने वाले दिन शुरू हो गये.

  •  कड़वी वाणी बोलना  –

आज के समय में बच्चो को घरो में वे संस्कार नहीं मिल पाते जिनकी जरूरत हर बच्चे को होती है. वे संस्कार ही होते है जो एक बच्चा बड़ा होकर एक आदर्श नागरिक बनता है. इन संस्कारो में एक बात अहम होती है और वह है की दूसरो के साथ हमेशा ही मीठे शब्दों में बातें की जाए और सभी से अच्छे से व्यवहार करे. लेकिन आज लोगो को अपने बच्चो को देने के लिए समय ही नहीं होता. जिस कारण वे अपने बच्चो को सही संस्कार नहीं दे पाते.

यही कारण है की आज कडवे वचन बोलने वाले लोगो की संख्या निरंतर बढती जा रही है. यह ध्यान रखो की कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति से कड़वे वचन न बोलो. हमें हर किसी से प्यार से बातें करनी चाहिए चाहे वह हमसे छोटा ही क्यों न हो. कड़वी बातें सुनना किसी को पसंद नहीं होता. ऐसे लोगो से हर कोई बचना चाहता है. अगर आप किसी से प्रेम पूर्वक नहीं बोल सकते तो कम से कम किसी का दिल दुखाने वाले कड़वे शब्दों को बोलने से बचे. वरना कड़वे शब्द बोलने का फल भी आपको कड़वा ही लगेगा.

  •  नीच पुरुषो के साथ रहना –

यहाँ चाणक्य जी का नीच पुरुषो के साथ रहने का मतलब है की ऐसे लोगो के साथ रहना जिनकी आदते बुरी होती है और जिनके साथ रहकर आप बुरे इंसान बनते जा रहे हो. आप अपने दोस्तों को ही देख ले और जरा उनके बारे में जाने. अगर आपको वे सही नहीं लगते तो उनको आज से ही छोड़ दे. जैसी संगती में आप रहोगे हमेशा वैसे ही बनोगे. आप चाहो या न चाहो पर उनका असर आप पर होना ही होना है.

बुरे लोगो के साथ रहने पर आप भी कभी उनके साथ किसी चीज में फंस सकते हो और यह कही इतना बड़ा न हो की आप जीते जी नरक की अनुभूति करे. आज जो आपको शराबी, जुवारी और नशेड़ी मिलते है उनमे से अधिकतर अपने दोस्तों के कारण ही बिगड़े हुए होते है. उनके साथ में जो लोग रहते है वे उनकी तरह ही होते है. खुद को हमेशा अपडेट करते रहे और देखे की कही आप किसी गलत ट्रैक पर तो नहीं हो. अगर आप गलत रास्ते पर जा रहे हो तो संभल जाए क्योंकि यह रास्ता आपको नरक की ओर ले जायेगा. जहाँ आप कभी भी खुश नहीं रह सकते.

  • अपने सगे सम्बन्धियों से वैर रखना –

जब किसी इंसान का जन्म होता है तभी से वह किसी न किसी रिश्ते में बंधता चले जाता है. उसके साथ वे रिश्ते जुड़ते चले जाते है जो उसके साथ जन्म से होते है और बड़े होने पर उसके सम्बन्धी और रिश्तेदार भी उसके साथ जुड़ते रहते है. अगर किसी के जीवन में ये लोग न हो तो उसको कभी भी जीने में मजा नहीं आएगा. हमारे रिश्ते हमारे जीने की एक बहुत बड़ी वजह होती है जिनसे जीने का आनंद मिलता है.

कई लोग अपने सगे – सम्बन्धियों से हमेशा ही वैर दुश्मनी रखते है. ऐसे लोग अपने करीबियों को ही नुकसान पहुँचाने की सोचते है. ऐसे लोग यह नहीं समझ पाते की जिनको वे अपना दुश्मन समझ रहे है वे उनके अपने ही होते है और उनका नुकसान उनके खुद का नुकसान है. अपने सम्बन्धियों से दुश्मनी रखकर कभी भी वह इंसान संतुष्ट नहीं रह सकता.

जो इंसान संतुष्ट नहीं है उसके लिए यह दुनिया नरक के समान ही है. इसलिए दोस्तों अपने सगे व परिजनों के साथ कभी भी अगर झगडा या किसी बात पर बहस होती है तो उसे प्यार से आपसी बातचीत से दूर करे. समझदारी के साथ उसका हल ढूंढे तभी आपको उचित न्याय मिल पायेगा. वैर रखकर कभी भी आपका भला नहीं हो सकता.

यह जीवन की सच्चाई है जिसे आचार्य चाणक्य ने बहुत पहले ही दुनिया को यह बात कह दी थी. अगर आप इन पांचो चीजो से दूर रहते हो तो आप नरक की तरह महसूस कराने वाले जीवन से हमेशा ही दूर रहोगे.

यह दुनिया आपको वैसे ही दिखती है जैसा आपका नजरिया होता है और जैसे आप कर्म करते हो यह ब्रह्माण्ड आपको उसका फल भी देता है. इसलिए अच्छी सोच रखे और यहाँ बताई गई बातो को अपनाकर खुद को Better बनाये.

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