इंसान की एक गलत आदत से मदद को आए भगवान लौट गए

इंसान अपने जीवन काल में  बहुत सी गलतियां करता है कुछ गलतियां तो उसकी गलत आदतों की वजह से होती है और कुछ हमारे मन की वजह से।
इंसान हमेशा गलत कर्मों की वजह से ही हारता है हम थोड़े से सुख के लालच में अपने अपने असली मकसद को भूल जाते है और फिर जीवन भर पछताते है इसे एक कहानी से समझते है –
एक बार एक व्यक्ति को अचानक कुछ काम की वजह से दूर जाना पड़ता है रास्ता लम्बा होता है तो वह जंगल का रास्ता चुनता है।  वह जंगल में से होकर गुजर रहा होता है। जंगल को भी क्रॉस करते करते काफी समय हो जाता है रात होने वाली होती है तो वो तेज़ी से चलते हुए रास्ता काटता है पर जंगल में ही उसे रात हो जाती है।  आगे एक गहरा कुआँ होता है तेज़ी से चलते चलते उसे अँधेरे मे कुआँ नहीं दिखता और वह उस कुँए में गिर जाता है।
कुँए की दीवार में से  एक छोटे से  पेड़ की टहनियां निकली हुई होती है गिरते समय उसके हाथ में एक टहनी आ जाती है और वे उसे पकड़ लेता है। अब वह अधर झूल में लटका है और बहुत घबराया है।  वह कुएं के नीचे देखता है तो उसके होश उड़ जाते है नीचे एक अजगर बैठा है अगर वो कुँए में कूदा तो वह उसे खा जाएगा। वह वहीं लटका रहता है पर पेड़ बड़ा कमजोर सा प्रतीत होता है उसे अहसास होता है की पेड़ के कमजोर तने में दीमक लगी हुई है और उसे चूहे लगातार कुतर रहे है वह कभी भी  गिर सकता है और उसके वजह को वह ज्यादा देर तक नहीं झेल पाएगा।
अब उसे भगवान याद आते है वह भगवान से प्रार्थना करता है और मदद की गुहार लगाता है।  उसके बार बार झूलने से उस पेड़ पर जो मधुमक्खी का छत्ता होता है वह भी हिलता है और उसमें से शहद की कुछ बूँद टपकने लगती है।  शहद उसके मुँह पर भी  गिरता है वह उसे चखता है तो उसे अत्यंत आनंद की प्राप्ति होती है। यह शहद स्वाद में एक दम मीठा है और बिलकुल ओरिजनल।  ऐसा शहद उसने पहले कभी नहीं चखा था।  वह शहद चकने में मशगूल हो जाता है।
इतने में क्योंकि उसने पहले भगवान से भी मदद मांगी थी तो भगवान वहां उसकी मदद को आते है वे उसे देखते है और अपना हाथ बढ़ा देते है कहते है मेरा हाथ पकड़ कर ऊपर आ जाओ।
लेकिन वह इंसान शहद के ख़त्म होने का इन्तजार करता है वह भगवान से कहता है भगवान अब आप आ ही गए हो मुझे बचा ही लोगे,मैंने ऐसा शहद पहले कभी नहीं चखा है आज मिला है थोड़ा ख़त्म कर लेने दो।  और फिर वह उस शहद के स्वाद में मशगूल हो जाता है अपने ऊपर आये उस भयंकर संकट को भूल कर। अचानक मिले शहद के मीठे स्वाद में वह अपने खतरनाक संकट को भूल उसे ही चखता रहता है।  कुछ समय बाद शहद टपकना बंद हो जाता है।
और फिर वह होश में आता है उसे अपनी ज़िंदगी खतरे में नजर आती है वह फिर घबरा जाता है और ऊपर देखता है और भगवान को ढूंढ़ता है लेकिन तब तक भगवान जा चुके होते है। कुछ समय बाद टहनी टूट जाती है और वह इंसान कुँए में गिर कर मर जाता है।
हमारे ऊपर भी ऐसी आपदाएं आती है जीवन में संकट आते है लेकिन हम उन संकटों का पूरा समाधान करने की बजाय संकट में मिले थोड़े अच्छे समय का ही आनंद लेने लग जाते है और असली मकसद भूल जाते है।  अब आप ही बताइये ऐसे भगवान भी मदद करेंगे तो कैसे। 

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