नहाने जा रहे है ? उससे पहले जान लें ये बातें और बदल लें आदत ..

वैसे तो शायद ही कोई ऐसा होगा जो नहाता नही होगा। हम सभी रोज नहाते है कोई सुबह- सुबह नहाता है कोई नाश्ता करके नहाता है कोई सुबह तो हाथ मुँह धो कर जाता है पर शाम को काम से लौट कर नहाता है और कोई रात को सोने से पहले नहाता है।

कुछ लोग ऐसे भी होते है जो सिर्फ तब नहाते है जब उन्हें गर्मी लगती है और कुछ गर्मी की वजह से बार बार नहाते है। कुछ उस वक़्त नहाने घुसते है जब घर में कोई मेहमान लगभग आ ही चुका होता है। और कुछ कहीं जाने से इन मौके पर नहाते है और इतना समय लगाते है जितना होता नही है।

पर हम सब लोग इस बात से अनजान है की नहाने की एक विशेष विधि है और नहाना भी कई प्रकार का होता है , सही तरह से और सही वक़्त पर किया स्नान आपको बेहद लाभ पहुंचा सकता है।

पढ़िए ये नहाने से जुडी ख़ास बातें जो नहीं है आपको पता :-

आज कल ये ट्रेंड हो गया है की ज्यादातर लोग सुबह सूर्य उग जाने के बाद ही जागते है और चाय नाश्ता कर लेने के बाद नहाते है, इस प्रकार चाय नाश्ते के बाद किया गया स्नान को दानव या राक्षस स्नान कहा जाता है। और इस वक़्त नहाने से आप पर इष्ट की कृपा काम हो जाती है।

नहाते समय सबसे पहले सर पर पानी डालना चाहिए इसके पीछे का कारण वैज्ञानिकों द्वारा किया गया शोध है वे बताते है सबसे पहले सर पर पानी डालने से शरीर के ऊपर की गर्मी पैरों के माध्यम से निकल जाती है।

शाम के वक़्त और रात को नहाना बिलकुल वर्जित माना जाता है हमें शाम के वक़्त नहाना नही चाहिए क्योंकि शाम को ग्रहण लगे हुए दिन नहाते है और जिनके घर में मौत हो जाती है वह सभी कार्य निपटा कर रात को या शाम को स्नान करते है सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण के दिन ही शाम को नहाया जाता है ताकि दोष मुक्त हो जाये तो ध्यान रखें शाम को न नहाये।

कुछ लोग नहाने के बाद तेल की मालिश करते है ऐसा कतई न करें तेल की मालिश नहाने से आधे घंटे पहले ही कर लें और नहाते वक़्त अच्छी तरह से नहाएं ताकि तेल पूरा उतर जाये इससे स्वास्थ्य और त्वचा दोनों अच्छे रहते है।

स्नान हमेश सूर्योदय से पहले यानी सुबह पांच बजे के आसपास ही करलेना चाहिए इस प्रकार के स्नान को ब्रह्म स्नान कहते है ऐसा करने से आप पर सभी देवी देवताओं की कृपा बनी रहती है इतना ही नही आप पूरा दिन सकारात्मक रहते है।

अगर आप सूर्योदय के बाद भी नहाते है तो भी नाश्ता करने से पूर्व ही नहाये और विभिन्न नदियों का नाम लेते हुए और अपने भगवान को याद करते हुए नहाये इसे देव स्नान कहा गया है और ऐसा करने से आप पर अपने इष्ट की कृपा सदा बनी रहेगी।

नहाने के बाद सूर्य को जल अर्पित करें इससे आपके मान सम्मान में वृद्धि होगी और एक बात और ध्यान दें नहाने के पश्चात भीगे हुए या हलके गीले भी कपडे नहीं पहनने चाहिए।
कुछ धार्मिक लोग तो सुबह जब आसमान में तारे दिखाई दे रहे होते है तभी स्नान कर लेते है इसे ऋषि स्नान कहा जाता है।

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