शिक्षाप्रद कहानी : पिता की आखिरी इच्छा

एक अमीर सेठ था जिसके पास बहुत सारा रुपया, गाडी, बंगला, ऐश आराम थे जो उसने तरह तरह के तरीके अपनाकर कमाए थे।  वक़्त बीतता गया और वह इंसान बहुत बूढा हो गया, उसे लग रहा था की अब मौत कभी भी आ सकती है इसलिए उसने अपनी वसीयत लिखने के लिए वकील बुलाया और सारी  संपत्ति अपने इकलौते बेटे के नाम लिख दी।  फिर उसने अपने बेटे को बुलाया और कहा की मैंने अपनी सारी   संपत्ति तुम्हारे नाम कर दी है। बेटा  सुनकर काफी खुश हो गया।  पिता ने आगे कहा, की बेटा  मेरे मरने के बाद मेरी आखिरी इच्छा जरूर पूरी करना।

बेटे ने भावुक होकर पिता से उनकी आखिरी इच्छा पूछी, तो पिता ने बताया की मेरे मरने के बाद ये फटा हुआ मौजा मुझे पहना देना, मैं जाता जाता ये मेरे पुराने संघर्ष वाले दिनों के फटे मोज़े पहनकर जाना चाहता हूँ। बेटे ने भी हामी भर दी।

वक़्त बीता और पिता की मृत्यु हो गयी। रस्मों के हिसाब से शरीर के सारे कपडे उतार कर नहलाकर उन्हें शय्या पर लेटा दिया गया। और जब उन्हें ले जाने की तैयारी थी तब बेटे ने पापा के पुराने फटे मोज़े लाकर पंडित को दिए और कहा की ये पिताजी को पहना दें।

लेकिन पंडित जी ने मोज़े पहनाने से इंकार कर दिया, उन्होंने कहा की हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इजाजत नहीं है। लेकिन बेटे की जिद थी की पिताजी की आखिरी इच्छा जरूर पूरी हो। बहस होने लगी, पंडित ने कहा की वह ये गलत काम नहीं करेगा, लड़का चाहे तो दूसरे पंडित से आगे के क्रियाकर्म की प्रक्रिया पूरी करवा ले। शहर के कई पंडित जमा हो गए लेकिन कोई भी इस आखिरी इच्छा को पूरा करने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसी बीच अंतिम संस्कार में देरी होते देख भीड़ में से एक आदमी निकल कर आया, और बेटे के हाथ में उसके पिता द्वारा लिखा हुआ खत थमा दिया। यह आदमी उसके पिता का काफी करीबी था। उसने कहा की यह खत तुम्हारे पिताजी ने मुझे तुम्हे इसी समय देने के लिए कहा था, बेटे ने जब पत्र खोला तो उसमें एक नसीहत लिखी थी –

देख रहे हो ? दौलत, बंगला,गाडी , बड़ी बड़ी फैक्ट्री, और बड़ा कारोबार होने के बावजूद भी एक फटा हुआ मोजा तक भी यहाँ से नही ले जा सकता।

एक रोज तुम्हे भी मृत्यु आएगी, और तुम्हे भी सिर्फ एक सफ़ेद कपडे में ही वापिस जाना पड़ेगा। इसलिए कोशिश करना पैसों के लिए कभी किसी को दुःख मत देना।
गलत तरीके से पैसा मत कमाना और पैसे को ज्यादा धर्म के और अच्छे कामों में ही लगाना क्योंकि अर्थी में तुम्हारे साथ सिर्फ तुम्हारे कर्म ही जाएंगे।

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