सफल होकर भी असफल तो नहीं आप?

हर इंसान के कुछ न  कुछ सपने होते है जिन्हे वो देर सवेर जीना चाहता है और वैसा ही काम करना चाहता है। अक्सर लोग पढाई करते वक़्त या जॉब में घुसने से पहले इस तरह के सपने और अपने मन के काम पहले ही सोच लेते है।  पर वे सपने जी नहीं पाते लेकिन फिर भी सफल है और एक अच्छी ज़िंदगी जी रहे है। समय की मांग  के चलते हम किसी और  काम को करना स्टार्ट कर देते हैं और पैसा कमान शुरू कर देते है ताकि जीवन बिना किसी रुकावट या तानों के चलता रहे। जैसे चाहते तो हम राइटर बनना थे लेकिन उस  समय परिस्तिथियाँ अनुकूल नहीं थी तो किसी एमएनसी में मार्केटिंग की जॉब स्टार्ट कर दी।  ठीक ठाक सैलरी मिलने लगी धीरे धीरे अपने पैसों से एक गाडी खरीद ली।
ऐसे में आप के आस पास के लोगों को रिलेटिव्स को लगता है की आप सही जा रहे हो आपकी लाइफ सेटल्ड हो रही है आप जीवन में ग्रोथ कर रहे है और फिर धीरे धीरे आप भी ऐसा ही मानना स्टार्ट कर देते है और अपनेआप को पूरी तरह उसी लाइफ में झोंक देते है।
अब आपका पूरा ध्यान आपकी नौकरी पर है की किस तरह उसमें और अच्छा किया जाये और प्रमोशन लिया जाये की और अच्छी सैलरी हो जाये और अच्छी डेसिग्नेशन मिल जाये।  अब आप मार्केटिंग में ही अपने आप को निखारने लगते है बॉस  को खुश करने लगते है और सोच लेते है की लाइफ अब ठीक जा रही है। यहाँ आप सफल तो हो रहे है पर क्या वाकई? ये थोड़ी सोचने की बात है।

जो आपका  सपना था जिस जूनून जिस इंटरेस्ट को आप करना चाहते थे वो कहाँ खो गया ? वो खोया नही था और  ना खोया है दरअसल हम ही एडजस्ट कर गए। कंफर्ट जोन हो गया  सफलता सी मिल गयी लाइफ ठीक चलने लगी तो हो गए एडजस्ट।
और ये सब इसलिए होता है क्योंकि कई ज़िम्मेदारियाँ होती है समाज का ख्याल होता है लाइफस्टाइल ठीक चलानी होती है पद प्रतिष्ठा बनानी होती है। और इतने सारे डर होने के बाद हम इस तरह की लाइफ चूज कर लेते है। लेकिन बाद में कहीं एक लेवल पर पहुँचने के बाद ये सपने फिर उठते है क्योंकि आपने उन्हें दबाया है ख़त्म नहीं हुए।  आपके पास सब कुछ होने के बावजूद आप बेचैन रहने लगेंगे असंतुष्ट रहने लगेंगे और फिर सोचेंगे की जिंदगी जीने के लिए बस लड़ता ही रहा ज़िंदगीभर पर वाकई मेरे लिए तो जिया ही नहीं। पर फिर करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं होता।
ऐसे में आप क्या कर सकते है ये बताते है।  बेशक अपने सपनों को हकीकत बनाना मुश्किल होता है कई जिम्मेदारियां होती है परेशानिया होती है पर उसके लिए जो करना है कीजिये नौकरी करें या कोई और काम पर उसे पूरे दिल से ना करें और उसमें अपना पूरा समय मेहनत ना दें ( अगर आप वाकई अपने सपनों को जीना चाहते है और ऐसे काम में जीवन खर्च नहीं करना चाहते जो आपको पसंद ही नहीं था ) उस नौकरी में प्रमोशन की उम्मीद ना रखें इसे सिर्फ समय की मजबूरी समझे और अपना फोकस अपने गोल पर ही रखें। जॉब के सहारे अपनी परिस्तिथि ठीक करें और फिर निकले अपने सपने का काम करने। टाइम मैनेज कीजिये और साथ साथ भी आप अपने मनपसंद काम जारी रख सकते है पर किसी भी कीमत पर फोकस मत हटाइये उसे ही गोल बनाइये।  अपनी प्रायोरिटी सेट कीजिये आप सचमुच सफल तभी होंगे जब आप अपने मनपसंद काम में  आगे बढ़ेंगे ना की सिर्फ लगे रहने से। 

You might also like

Leave A Reply