भगवान की मूर्ति की पूजा क्यों करते है हम? जानिए सटीक जवाब

अक्सर गैर धर्म को मानने वाले लोग और भगवान् को ना मानने वाले लोग यह सवाल करते है की हिन्दू मूर्ती क्यों पूजते है? पत्थर को भगवान् मान कर क्यों पूजते है? मूर्तियों में हिंदुओं की इतनी आस्था क्यों होती है? विवेकानंद ने इस बात का एकदम सटीक उत्तर एक धनी व्यक्ति को दिया था, जानिए।

एक बार विवेकानंद जी एक धनी व्यक्ति के घर गए, धनी व्यक्ति ने उन्हें सम्मान पूर्वक बिठाया, कुछ बातचीत करने के बाद धनी व्यक्ति ने कहा की लोग भगवान की पूजा मूर्तियों में क्यों करते है जबकि मूर्ती पत्थर, पीतल, मिटटी और अन्य धातुओं की बनती है उनमें भगवान तो होते नहीं! फिर मूर्ती पर इतनी आस्था क्यों?

विवेकानंद जी ने देखा की धनी व्यक्ति के एकदम पीछे दीवार पर एक तस्वीर लगी हुई थी, उन्होंने उस धनी व्यक्ति से आग्रह किया की उस तस्वीर को उतार कर लाएं। वह व्यक्ति उस मूर्ती को उतार कर लाया और विवेकानंद जी को दी।  विवेकानंद जी ने देखा की मूर्ती पर माला चढ़ी हुई है पूछने पर धनी व्यक्ति ने बताया की यह उनके स्वर्गीय पिताजी की तस्वीर है।  विवेकानंद जी ने तब कहा की आप इस तस्वीर पर थूकिये।

यह सुनते ही धनी व्यक्ति गुस्सा हो गया और कहने लगा की आप ये कैसी बेतुकी सी बात कह रहे है महानुभाव थोड़ा सोच समझकर तो बात कीजिये।

विवेकानंद ने आगे कहा की यह तस्वीर कागज़ और कांच की ही तो बनी है और चारो और लकड़ी का फ्रेम लगा हुआ है।  निर्जीव तस्वीर है।  फिर भी तुम इसपर नही थूक सकते क्योंकि इस तस्वीर में तुम्हे अपने स्वर्गीय पिताजी के होने का अहसास होता है।

तुम इस तस्वीर को देखकर अपने पिताजी से जुड़ाव महसूस करते हो और समझते हो की वे तुम्हारे साथ ही है और आस पास है। इसीलिए तुम इस तस्वीर को देखकर कभी बात करते हो कभी आशीर्वाद लेते हो।  ठीक वैसे ही मूर्तियों में हम भगवान् के होने का अहसास करते है, ये आस्था और विश्वास की ही बात है, हमारी आस्था और विश्वास इतना सच्चा होता है की मूर्ती में भी भगवान् का वास हो जाता है, हमे उनके होने का अहसास होता है।

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