मरने के बाद कौन बनता है भूत, कैसे मिलती है ताकत, जानिए

 सबसे पहले तो आत्मा और भूत में अंतर समझना जरूरी है, आत्मा के तीन प्रकार होते है जीव आत्मा , प्रेतात्मा और सूक्ष्मात्मा, आत्मा इंसान के शरीर में हमेशा रहती है जब आत्मा भौतिक व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करती है तब जीवात्मा होती है, जैसे ही उसका प्रवेश कामना से भरे, इच्छाओं और वासनाओं से भरे शरीर में होता है वह प्रेतात्मा बन जाती है।

 इससे आपको भूत और प्रेत में फर्क समझ आ गया होगा, भूत सबसे शुरूआती पद है यानी जब को सीधा साधा आम आदमी मरता है तो वह सबसे पहले भूत ही बनता है।  और जब वह व्यक्ति कोई लालसा, इच्छा और आकांशा लेकर मरता है तो वह प्रेत बन जाता है।  भूत की बहुत सारी जातियां होती है जैसे भूत, फिर प्रेत, फिर पिचाश , राक्षस वगेरह।

 

ऐसे ही जब कोई शादीशुदा महिला मरती है तो वो चुड़ैल बनती है, कुंवारी लड़की देवी बनती है और अगर बुरे कर्म और बुरी आदतों वाली स्त्री मरती है तो वो डायन बनती है। आपने तो सुना ही होगा की इंसान 84 लाख योनियां जीने के बाद इंसान बनता है।  मारने के बाद आत्माएं भूत या प्रेत योनि में जाती ही है और वहां जाकर वह बहुत ताकतवर और बलवान बन जाती है।  कुछ तो पूरी 84 लाख योनियां जीते है और कुछ सीधे ही गर्भ धारण करके फिर से इंसान बन जाते है।  ये सब प्रेत की ताकत पर निर्भर करता है और ताकत उनके कर्मों पर निर्भर करती है। 

मरने के बाद प्रेत योनि में जाने का मुख्य कारण तीर्व आकांशाओं और इच्छाओं की अतृप्ति है।  नार्मल लाइफ में भी देखा जाता है जब आपके मन में कोई नयी योजना या कुछ करने का विचार आता है तो उसके पूरा करने तक इंसान बैचैन हो जाता है और अगर किसी कारण से वो इच्छा या लालसा पूरी नहीं हो पा रही है या हमे लगता है की हमारी ये योजना या इच्छा अधूरी रह जाएगी तो हमारी कई रातों की नींद उड़ जाती है।  यही बात है इच्छाओं से भरे लोग ना शांत रह पाते, ना चैन से सो पाते जब तक की उस कामना की पूर्ती नहीं होती वे उग्र ही बने रहते है। प्रेत योनि भी ऐसी ही अशांति और अतृप्त स्तिथि से भरी जीवन दशा का नाम है।  ऐसे ही जब किसी वासना और लालसा से भरे व्यक्ति की मृत्यु होती है जिसकी तीव्र इच्छाएं पूरी नहीं हुई है जिसकी आत्मा अतृप्त है उसे मृत्यु के बाद कई सालों तक भूत-प्रेत की योनि में रहना पड़ता है।  और फिर वह सिर्फ अशांत सा भटकता रहता है और घरवालों को परेशान करता है वह बुरा बन जाता है।  क्योंकि अतृप्त इंसान सदैव दूसरों से जलता है, दूसरों से ईर्ष्या करता है, जीते जी उसके पास इतनी ताकत नहीं होती की वह दूसरों को परेशान कर सके, लेकिन वह प्रेतात्मा बनने के बाद घरवालों को परेशान करते है इसी लिए श्राद्ध और ऐसे ही अन्य कार्य किये जाते है ताकि उनकी मृत और अतृप्त आत्माओं को शांति मिल सके।

जो व्यक्ति भूखा, प्यासा मरता है, सम्भोग सुख से वंचित रहकर मरता है, गुस्सा, लोभ, वासना आदि लेकर मरता है वह निश्चित तौर पर भूत बन कर भटकता रहता है।  जो इंसान एक्सीडेंट में, आत्महत्या करके या जिसकी हत्या की गयी हो ऐसे लोग भी भूत बनकर भटकते रहते है।  ये भूत प्रेत हमेशा भटकते रहते है इन्हें शांति नहीं मिलती है इन्हें खाने और पीने की बहुत इच्छा और लालसा रहती है लेकिन इन्हें तृप्ति नहीं मिल पाती है।  ये किसी घर में या जंगलों में भटकते रहते है और मुक्ति दिलाने वाली की  खोज करते रहते है।
कहते है भूत ज्यादा शोर, उजाले आदि से दूर रहते है ये ज्यादा उन स्थानों में रहना पसंद करते है जहाँ से इनके जीवन काल में ज्यादा सम्बन्ध रहा हो या तो फिर किसी एकांत स्थान पर जहाँ ज्यादा कोई आता जाता ना हो।
भूत की ताकत : भूत प्रेत अदृश्य होते है यानी दिखाई नहीं पड़ते है, ये शरीर रहित होते है  क्योंकि ये प्रायः वायु समेत 16 तत्वों से बने होते है।  जिन भूतों को अपनी इस शक्ति का पता होता है वे इसे इस्तेमाल करना जानते है।  कुछ भूतों को दूसरों को टच करने की शक्ति होती है और कुछ को नहीं होती।  जिनकों होती है वे बड़े से बड़े पेड़ और खम्बों को भी उखाड़ कर फैंक सकते है।  अगर ये बुरे भूत हुए तो बहुत ही खतरनाक साबित होते है।  ऐसे भूत किसी भी इंसान को अपने होने का अहसास करवा सकते है।  इतना ही नहीं ऐसे बुरे भूत किसी की मानसिक स्तिथि से खेल कर उससे कुछ भी करवा सकते है इतनी ताकत रखते है।  इनपर गोली, तलवार, डंडे का असर नहीं होता है क्योंकि ये वायु जैसे तत्वों से बने होते है

अच्छी और बुरी आत्माएं दोनों ही ऐसे लोगों को तलाश करती है जो उनकी वासनाओं की पूर्ती कर सके।  अच्छी आत्माएं अच्छे कर्म करने वाले की तलाश करती है उसी के अनुरूप आत्मा उनमें प्रवेश करती है और तृप्त होकर उसे भी तृप्त करती है।  अधिकतर लोगों को इस बात का पता ही नहीं चल पाता है।  बुरी आत्माएं बुरे इंसान के माध्यम से तृप्त होकर उसे और बुराई, कुकर्म करने के लिए प्रेरित करती है और उस इंसान को पता ही नहीं चल पाता की कोई दूसरी शक्ति उसपर राज कर रही है और उसे बुरे कर्मों में लिप्त कर रखा है।

इसीलिए धार्मिक होना, भगवान् की पूजा पाठ आदि में लिप्त होना जरूरी है ऐसा बताया गया है ताकि आपका मन, गुण आपके कर्म पवित्र और साफ़ हो।  तभी आप ऐसी आत्माओं से बचे रह सकते है।

You might also like

Leave A Reply